मैं जब से देख सुन रहा हूँ,

तब से याद है मुझे…
ख़ुदा जला बुझा रहा है रात दिन
ख़ुदा के हाथ में है, सब बुरा भला
दुआ करो…!!
अजीब सा अमल है ये,एक फ़र्ज़ी गुफ़्तगू,
और एकतरफा-एक ऐसे शख़्स से, ख़्याल जिसकी शक्ल है,
ख़्याल ही सबूत है…!!!
-गुलज़ार
गुलज़ार साहेबांच्या दृष्टिकोणातून, निव्वळ कल्पना हाच ज्याच्या अस्तित्वाचा पुरावा आहे अश्या ‘देव’ या संकल्पनेवर…नव-आस्तिक्यवादावर…थेट भाष्य केलंय शब्दीप्ता मासिकातील नितीन कळंबे याने,…
एक खास लेख…
“नास्तिकांची दैवते”

Read Full Article
Like the fb page Shubdeepta

[embeddoc url=”http://shubdeepta.com/wp-content/uploads/2016/01/7-.pdf” download=”all”]

NO COMMENTS